29 जून 2012

कूंडा की याद


कूंडा खाए आज चौदा  दिन हो गए हैं लेकिन याद अब भी सता रही है. अब एक मौक़ा और है।
शबे बरात। लेकिन उस रात तो हलवा बनता है। चने का हलवा और रवा का, खीर तो साल में एक बार ही मज़ा देती है चाहे आप साल भर बनाते रहें। कूंडे की खीर का ज़ाइका ही कुछ और है। माहे रजब में ताकीबात और कूंडे वाह ... इबादत की लज्ज़त और खीर की लज्ज़त।