18 दिसंबर 2010

करारी में फ़ाक़ा शिकनी

रोज़े आशूर कर्बला में जुलूस ख़त्म करने और ताज़िया दफ्न करने के लोग अपने अपने इमामबाड़ों में फाक़ा शिकनी करने जाते हैं. तक़रीबन बीस बरसों से डा. अख्तर हसन रिज़वी (रिज़वी बिल्डर्स) अपने वालिदे मरहूम के ईसाले सवाब के लिए बड़े दरवाज़े के इमामबाड़ा में फ़ाक़ा शिकनी का प्रोग्राम का एहतेमाम करवाते हैं. लेकिन चंद अफराद के एतेराज़ की वजह से गुज़िश्ता साल से यह एहतेमाम रोशन अली के इमामबाड़े में मुन्ताकिल कर दिया गया. इस साल दीगर अफराद ने यह गुजारिश की है के इंशाल्लाह यह प्रोग्राम बड़े दरवाज़े होना चाहिए ताकि मरकज़ीयत बनी रहे.

बड़े दरवाज़े के इमामबाड़े के पीछे और बरगद के नीचे फ़ाक़ा शिकनी का दाल और चावल तैयार हो रहा है.

 

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