28 जुलाई 2010

मरहूम शमीम काजिम का चेहलुम

मरहूम शमीम काजिम का चेहलुम २५ जुलाई को उनके आबाई गाँव रक्सुवारा में हुआ जो करारी से तकरीबन चार कि मि दूर है. . मजलिस मौलाना मिर्ज़ा मोहम्मद अशफाक साहब ने पढी . मरहूम नई दिल्ली के ओखला के कब्रस्तान में अपनी अहलिया मर्हुमः के सरहाने दफन हैं. यह कब्रस्तान बटला हाउस के बिलकुल करीब है. न जाने ऐसा क्यूँ हुआ कि उन्हें अपने आबाई वतन में दफन नहीं किया गया और मुसलमानों के इस मुश्तरका कब्रस्तान में गुमनामी के हवाले कर दिया गया जहाँ कोई शमा रौशन करने वाला भी नहीं है, फातेहा पढना तो दूर की बात है . यह इतनी बड़ी शख्सियत के साथ सितम ज़रीफी नहीं है तो क्या है! अल्लाह तआला मरहूम को जवारे आइम्मा में जगह दे. आप भी उन्हें एक सुरह फातेहा से बख्श दें, क्यूँ की अब वोह आप के मोहताज हैं. मौत सब से बड़ी इबरत है अगर लेने वाला ले सके .
नीचे की तस्वीर उनके कब्र की है जिस पर अभी कोई निशान नहीं है.